भारतीय भाषाओं के सशक्तीकरण में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भूमिका

Authors

  • डॉ.निशान्त कुमार पाण्डेय सहायक आचार्य हे.न.ब. स्नातकोत्तर महाविद्यालय लालगंज प्रतापगढ़, संबद्ध प्रोफेसर राजेंद्र सिंह (रज्जू भैय्या) विश्वविद्यालय,प्रयागराज Author

DOI:

https://doi.org/10.64880/pcjaict.v1i6.14

Keywords:

मातृभाषा, पब्लिक, ई-कंटेंट, शब्दकोश, बहुभाषिकता

Abstract

विविधताओं को आत्मसात करते हुए एक सूत्र में मजबूती से बंधे होना हमारी प्रमुख विशेषता है। विविधता का एक आयाम भाषा भी है। हमने हमेशा अपनी स्थानीय भाषाओं को महत्व दिया है। क्षेत्रीय भाषाओं के बिना भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की कल्पना नहीं की जा सकती है। बच्चों के लिए संप्रेषण का सबसे सशक्त माध्यम उनकी मातृभाषा होती है। शोधों में यह देखा गया है कि बाल्यावस्था में बालकों का अधिकांश मानसिक विकास हो जाता है, अतः इस अवस्था में मातृभाषा के माध्यम से शिक्षा प्रदान करना सर्वाधिक उपयुक्त है। प्रथम एवं द्वितीय शिक्षा नीतियों  में मातृभाषा को महत्व दिया गया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 मातृभाषा में शिक्षा प्रदान करने एवं क्षेत्रीय भाषाओं को महत्व देने के लिए संकल्पित है। शिक्षा नीति में स्थानीय/क्षेत्रीय भाषाओं को सशक्त करने के लिए विभिन्न अनुशंसाएं की गई हैं। जिसके अंतर्गत इन भाषाओं में शब्दकोश निर्माण, डिजिटल सामग्री (ई-कंटेंट) उपलब्ध कराना, पुस्तक निर्माण, शिक्षकों का पैनल तैयार करना, तकनीकी शब्दावली का विकास, उच्च शिक्षा में प्रयोग, विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में विकल्प भाषा के रूप में प्रस्तुत करना आदि शामिल हैं। अंग्रेजी भाषा के प्रति हम भारतवासियों का अवांछित आकर्षण स्थानीय भाषाओं की उन्नति में बाधक है। यद्यपि कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति की भाषा संबंधी अनुशंसाओं का क्रियान्वयन शुरू हो गया है, किंतु अब तक का प्रयास ऊंट के मुंह में जीरा जैसा प्रतीत होता है। हमें अपनी भाषाओं को सशक्त करने के लिए अभी बहुत कुछ करना शेष है।

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Published

2026-10-26

How to Cite

भारतीय भाषाओं के सशक्तीकरण में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भूमिका. (2026). THE PARADIGM CHRONICLE JOURNAL OF ACADEMIC INQUIRY & CRITICAL THOUGHT, 1(6), 151-156. https://doi.org/10.64880/pcjaict.v1i6.14