विद्यालयी शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा, 2023 के परिप्रेक्ष्य में समावेशी शिक्षा: सिद्धांत, प्रावधान एवं क्रियान्वयन की चुनौतियाँ

Authors

  • नवीन कुमार रिसर्च स्कॉलर, शिक्षाशास्त्र विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ Author
  • डॉ. नीतू सिंह एसोसिएट प्रोफेसर, शिक्षाशास्त्र विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ Author

DOI:

https://doi.org/10.64880/pcjaict.v1i4.02

Keywords:

समावेशी शिक्षा, राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF-SE 2023), समावेशी विद्यालयी शिक्षा, समावेशी शिक्षा के सिद्धांत, समावेशी शिक्षा का क्रियान्वयन।

Abstract

प्रस्तुत शोध-पत्र विद्यालयी शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा, 2023 के परिप्रेक्ष्य में समावेशी शिक्षा: सिद्धांत, प्रावधान एवं क्रियान्वयन की चुनौतियाँ विषय पर आधारित है। वर्तमान समय में समावेशी शिक्षा भारतीय विद्यालयी शिक्षा की एक महत्वपूर्ण आवश्यकता बन चुकी है। इसका उद्देश्य प्रत्येक शिक्षार्थी को उसकी सामाजिक, आर्थिक, भाषाई, सांस्कृतिक, लैंगिक अथवा शारीरिक-मानसिक भिन्नताओं के बावजूद समान, सुलभ एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप विकसित राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF-SE 2023) समावेशी, न्यायपूर्ण तथा शिक्षार्थी-केंद्रित शिक्षा व्यवस्था के निर्माण पर विशेष बल देती है। इस शोध का उद्देश्य NCF-SE 2023 में निहित समावेशी शिक्षा की अवधारणा एवं सिद्धांतों का अध्ययन करना, समावेशी शिक्षा से संबंधित प्रमुख प्रावधानों का विश्लेषण करना, इसके क्रियान्वयन में आने वाली चुनौतियों का परीक्षण करना तथा प्रभावी कार्यान्वयन हेतु व्यावहारिक सुझाव प्रस्तुत करना है। अध्ययन गुणात्मक अनुसंधान दृष्टिकोण पर आधारित है, जिसमें वर्णनात्मक एवं विश्लेषणात्मक पद्धति का उपयोग किया गया है। शोध के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF-SE 2023), राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम-2016, यूनेस्को की रिपोर्टों, शोध-पत्रों, पुस्तकों तथा अन्य प्रामाणिक प्राथमिक एवं द्वितीयक स्रोतों से सामग्री संकलित की गई है। प्राप्त तथ्यों का विषयवस्तु विश्लेषण के माध्यम से अध्ययन किया गया। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि NCF-SE 2023 समावेशी शिक्षा को केवल दिव्यांग विद्यार्थियों तक सीमित नहीं रखती, बल्कि प्रत्येक शिक्षार्थी की विविध आवश्यकताओं, क्षमताओं एवं अधिगम शैली का सम्मान करने वाली शिक्षा व्यवस्था का समर्थन करती है। इसमें समानता, विविधता का सम्मान, शिक्षार्थी-केंद्रित शिक्षण, सार्वभौमिक अधिगम अभिकल्प , बहुभाषिकता, लचीले मूल्यांकन तथा सहयोगात्मक अधिगम जैसे सिद्धांतों को विशेष महत्व दिया गया है। साथ ही, शिक्षक प्रशिक्षण, सहायक प्रौद्योगिकी, सुलभ अवसंरचना तथा समुदाय की सहभागिता को समावेशी शिक्षा की सफलता के लिए आवश्यक माना गया है। शोध में यह भी पाया गया कि NCF-SE 2023 के प्रभावी क्रियान्वयन में प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी, संसाधनों एवं आधारभूत सुविधाओं का अभाव, सामाजिक पूर्वाग्रह, बड़ी कक्षाएँ, सीमित वित्तीय सहायता तथा नीति और व्यवहार के बीच अंतर जैसी चुनौतियाँ विद्यमान हैं। इन समस्याओं के समाधान हेतु सतत शिक्षक प्रशिक्षण, समावेशी विद्यालयी वातावरण, पर्याप्त संसाधनों की उपलब्धता, सहायक प्रौद्योगिकी का विस्तार, प्रभावी निगरानी तथा अभिभावकों एवं समुदाय की सक्रिय सहभागिता आवश्यक है। निष्कर्षतः, NCF-SE 2023 भारतीय विद्यालयी शिक्षा को अधिक समतामूलक, न्यायसंगत एवं समावेशी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसकी सफलता प्रभावी क्रियान्वयन, संस्थागत सहयोग तथा सभी हितधारकों की सक्रिय भागीदारी पर निर्भर करती है।

Downloads

Published

2026-08-14

Issue

Section

Articles

How to Cite

विद्यालयी शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा, 2023 के परिप्रेक्ष्य में समावेशी शिक्षा: सिद्धांत, प्रावधान एवं क्रियान्वयन की चुनौतियाँ. (2026). THE PARADIGM CHRONICLE JOURNAL OF ACADEMIC INQUIRY & CRITICAL THOUGHT, 1(4), 12-18. https://doi.org/10.64880/pcjaict.v1i4.02