श्री अरविन्द का पूर्ण योग दर्शन: आधुनिक शिक्षा प्रणाली में योगदान एवं प्रासंगिकता का एक विश्लेषणात्मक अध्ययन
DOI:
https://doi.org/10.64880/pcjaict.v1i4.03Keywords:
श्री अरविन्द, पूर्ण योग, पूर्ण शिक्षा, वर्तमान शिक्षा प्रणाली, राष्ट्रीय शिक्षा नीति २०२०, चेतना का विकास।Abstract
प्रस्तुत शोध पत्र का मुख्य उद्देश्य महर्षि अरविन्द घोष के 'पूर्ण योग दर्शन' का वर्तमान भारतीय शिक्षा प्रणाली के संदर्भ में मूल्यांकन और उसकी व्यावहारिक प्रासंगिकता को खोजना है। २१वीं सदी की आधुनिक शिक्षा प्रणाली अत्यधिक तकनीकी, व्यावसायिक और भौतिकवादी हो चुकी है, जिसके परिणामस्वरूप विद्यार्थियों में मानसिक तनाव, नैतिक पतन और एकाग्रता की कमी देखी जा रही है। श्री अरविन्द का दर्शन यह प्रतिपादित करता है कि शिक्षा केवल सूचनाओं को संकलित करने का साधन नहीं है, बल्कि यह मानव की अंतर्निहित चेतना के क्रमिक विकास की प्रक्रिया है। इस गुणात्मक और दार्शनिक अध्ययन में श्री अरविन्द के 'पूर्ण शिक्षा' के पांच स्तरों शारीरिक, प्राणिक, मानसिक, अंतरात्मिक और आध्यात्मिक का विश्लेषण किया गया है। साथ ही, यह शोध पत्र वर्तमान 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति २०२०' के समग्र विकास के लक्ष्यों के साथ अरविन्द के शैक्षिक दर्शन के अंतर्संबंधों को रेखांकित करता है। निष्कर्षतः, यह अध्ययन यह स्थापित करता है कि यदि वर्तमान पाठ्यक्रम में योग दर्शन के व्यावहारिक पक्षों को समाहित किया जाए, तो यह न केवल विद्यार्थियों का बौद्धिक विकास करेगा, बल्कि उन्हें एक संतुलित, जागरूक और नैतिक वैश्विक नागरिक बनाने में भी सहायक सिद्ध होगा।