ग्रामीण महिलाओं का सशक्तिकरण और डिजिटल समावेशन
DOI:
https://doi.org/10.64880/pcjaict.v1i4.11Keywords:
डिजिटल समावेशन, सशक्तिकरण, लैंगिक असमानता, डिजिटल साक्षरता, वित्तीय समावेशन।Abstract
डिजिटल तकनीक आज विकास और प्रगति का मूल आधार बन चुकी है परन्तु इसके लाभ समान रूप से समाज के सभी वर्गों तक नहीं पहुँच पाए हैं। ग्रामीण महिलाएँ, जो भौगोलिक तथा लैंगिक दोनों ही रूपों में हाशिए पर हैं, डिजिटल संसाधनों तक पहुँच और उनके उपयोग में अनेक संरचनात्मक बाधाओं का सामना करती हैं। यह शोध-पत्र ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण और डिजिटल समावेशन के पारस्परिक सम्बन्ध का विश्लेषण करता है, प्रमुख अवरोधों की पहचान करता है, सफल पहलों का अध्ययन प्रस्तुत करता है, तथा भविष्य के लिए ठोस नीतिगत सुझाव प्रदान करता है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि जब डिजिटल पहुँच को शिक्षा, प्रशिक्षण, सुलभता, और सामाजिक-सांस्कृतिक समर्थन से जोड़ा जाता है, तब यह आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक—तीनों स्तरों पर महिलाओं के सशक्तिकरण को गति देता है।
Downloads
Published
2026-08-26
Issue
Section
Articles
How to Cite
ग्रामीण महिलाओं का सशक्तिकरण और डिजिटल समावेशन. (2026). THE PARADIGM CHRONICLE JOURNAL OF ACADEMIC INQUIRY & CRITICAL THOUGHT, 1(4), 103-112. https://doi.org/10.64880/pcjaict.v1i4.11