उच्च प्राथमिक विद्यालयों में अध्ययनरत सामान्य एवं विशेष बच्चों की तार्किक योग्यता का तुलनात्मक अध्ययन
DOI:
https://doi.org/10.64880/pcjaict.v1i5.03Keywords:
उच्च प्राथमिक स्तर, सामान्य विद्यार्थी, विशेष विद्यार्थी, तार्किक योग्यताAbstract
शिक्षा बालक के सर्वांगीण विकास का महत्वपूर्ण माध्यम है और वर्तमान समय में केवल पाठ्य-पुस्तकीय ज्ञान के स्थान पर तर्क, विश्लेषण, समस्या-समाधान, निर्णय लेने तथा निष्कर्ष निकालने जैसी उच्च स्तरीय मानसिक क्षमताओं के विकास पर विशेष बल दिया जा रहा है। उच्च प्राथमिक स्तर बाल्यावस्था से किशोरावस्था की ओर संक्रमण की महत्वपूर्ण अवस्था है, जिसमें विद्यार्थियों की बौद्धिक, सामाजिक, संवेगात्मक तथा मानसिक क्षमताओं का तीव्र विकास होता है। तार्किक योग्यता विद्यार्थी को तथ्यों एवं सूचनाओं के बीच संबंध स्थापित करने, समानता-असमानता पहचानने, क्रम निर्धारित करने, कारण-परिणाम समझने तथा उचित निष्कर्ष तक पहुँचने में सहायता करती है। समावेशी शिक्षा के वर्तमान संदर्भ में सामान्य एवं विशेष बच्चों को समान शैक्षिक अवसर उपलब्ध कराना आवश्यक है। विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की सीखने की क्षमता को केवल उनकी शारीरिक, संवेदी, बौद्धिक अथवा अन्य कठिनाइयों के आधार पर निर्धारित नहीं किया जा सकता, क्योंकि उचित शिक्षण विधि, सहयोगी वातावरण, अनुकूलित सामग्री तथा आवश्यक सहायता मिलने पर उनमें भी तार्किक चिंतन का प्रभावी विकास संभव है। इसी दृष्टि से प्रस्तुत अध्ययन में सामान्य एवं विशेष विद्यार्थियों की तार्किक योग्यता की तुलना की गई। अध्ययन में कुल 500 विद्यार्थियों को सम्मिलित करने की योजना रखी गई, जिनमें 250 सामान्य तथा 250 विशेष विद्यार्थी हैं। तार्किक योग्यता के मापन हेतु के. बायति द्वारा निर्मित तार्किक योग्यता परीक्षण का प्रयोग किया गया तथा प्राप्त आँकड़ों का विश्लेषण मध्यमान, मानक विचलन और क्रान्तिक अनुपात के आधार पर किया गया। निष्कर्ष रुप में पाया कि उच्च प्राथमिक विद्यालयों में अध्ययनरत सामान्य एवं विशेष छात्रों की तार्किक योग्यता में सार्थक अन्तर नहीं पाया गया, उच्च प्राथमिक विद्यालयों में अध्ययनरत सामान्य एवं विशेष छात्राओं की तार्किक योग्यता में सार्थक अन्तर नहीं पाया गया।