शिक्षा में मूल्यांकन प्रक्रिया का बदलता परिदृश्य : भारत के संदर्भ में

Authors

  • डॉ. संजय कुमार गुप्ता सेवा निवृत व्याख्याता जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान,कुमारबाग, पश्चिम चम्पारण, बिहार Author

DOI:

https://doi.org/10.64880/pcjaict.v1i5.05

Keywords:

प्रतिस्पर्धात्मक अधिगम, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 , विद्यालय आधारित मूल्यांकन

Abstract

मूल्यांकन शिक्षण अधिगम प्रक्रिया का महत्वपूर्ण घटक है जो न केवल शिक्षार्थियों के उपलब्धि का आकलन करती है बल्कि शिक्षण अधिगम प्रक्रिया एवं पाठ्यचर्या दोनों को दिशा दिखाती है। भारतीय शिक्षा व्यवस्था के स्वरूप में समय के साथ आमूल चूल परिवर्तन हुआ है। प्राचीन भारतीय शिक्षा व्यवस्था अंतर्गत मूल्यांकन मुख्यतः शिक्षार्थी के तर्क शक्ति, स्मरण शक्ति, दैनिक व्यवहार,व्यावहारिक दक्षता, अनुशासन,नैतिक आचरण, व्यक्तिगत क्षमताओं के निरंतर अवलोकन पर आधारित थाl औपनिवेशिक शिक्षा व्यवस्था में निश्चित पाठ्यक्रम निर्धारित शिक्षण अधिगम प्रक्रिया समान प्रश्न पत्र,अंक आधारित लिखित परीक्षा प्रणाली एवं  प्रमाण पत्र आधारित केंद्रीय कृत मूल्यांकन व्यवस्था को तवज्जो दिया गया। जो प्रशासनिक दृष्टि से राष्ट्र स्तर पर शिक्षा के मानकीकरण को तो संभव कर पाया,परंतु मूल्यांकन धीरे-धीरे स्मृति पुर्नउत्पाद, व्यक्तिगत स्पर्धात्मक एवं परीक्षा केंद्रित बन गया। स्वतंत्रता के उपरांत विभिन्न आयोगो  के सिफारिश के आधार पर मूल्यांकन को अधिक व्यापक बल केंद्रित विकासोन्मुखी बनाने का प्रयास किया गया। सतत एवं व्यापक मूल्यांकन अंतर्गत शिक्षार्थियों के संज्ञानात्मक पक्ष के साथ-साथ सामाजिक, भावनात्मक, शारीरिक, व्यावसायिक पक्षो के विकास को भी सुनिश्चित करने हेतु प्रयास किया गया। वर्तमान राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में मूल्यांकन को सिखाने में सुधार करने वाली सतत एवं रचनात्मक प्रक्रिया के रूप में पुनर्परिभाषित किया गया यह परिवर्तन भारतीय शिक्षा व्यवस्था को अधिक समावेशी,बाल केंद्रित,व्यावहारिक एवं गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है

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Published

2026-09-10

How to Cite

शिक्षा में मूल्यांकन प्रक्रिया का बदलता परिदृश्य : भारत के संदर्भ में. (2026). THE PARADIGM CHRONICLE JOURNAL OF ACADEMIC INQUIRY & CRITICAL THOUGHT, 1(5), 43-47. https://doi.org/10.64880/pcjaict.v1i5.05