रायबरेली जनपद के माध्यमिक स्तर पर अध्ययनरत शहरी छात्र एवं छात्राओं की पर्यावरण के प्रति जागरूकता का तुलनात्मक अध्ययन
DOI:
https://doi.org/10.64880/pcjaict.v1i5.09Keywords:
माध्यमिक स्तर,शहरी छात्र एवं छात्राऐं, मानसिक स्वास्थ्यAbstract
वर्तमान में जनसंख्या वृद्धि, नगरीकरण, औद्योगीकरण, वनों की कटाई, प्रदूषण, प्लास्टिक अपशिष्ट, प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन तथा जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याओं के कारण पर्यावरणीय संतुलन गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है। ऐसी स्थिति में पर्यावरण संरक्षण के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि प्रत्येक नागरिक में पर्यावरणीय जागरूकता विकसित करना आवश्यक है। पर्यावरणीय जागरूकता में पर्यावरण संबंधी ज्ञान के साथ-साथ संवेदनशीलता, सकारात्मक अभिवृत्ति तथा संरक्षणात्मक व्यवहार भी सम्मिलित होते हैं। इस दृष्टि से विद्यालय विद्यार्थियों में पर्यावरणीय चेतना विकसित करने का प्रमुख माध्यम है। विशेष रूप से माध्यमिक स्तर पर विद्यार्थी किशोरावस्था में होते हैं और उनमें तार्किक चिंतन, निर्णय क्षमता, सामाजिक उत्तरदायित्व तथा समस्या समाधान की क्षमता का विकास हो रहा होता है। अतः इस अवस्था में पर्यावरण संरक्षण संबंधी ज्ञान एवं व्यवहार विकसित करना भविष्य के उत्तरदायी नागरिकों के निर्माण में सहायक हो सकता है। प्रस्तुत अध्ययन में रायबरेली जनपद के शहरी माध्यमिक विद्यालयों के 250 विद्यार्थियों, जिनमें 125 छात्र एवं 125 छात्राएँ सम्मिलित हैं, को न्यादर्श के रूप में लिया गया। आंकड़ों के संकलन के लिए प्रो. डॉ. एम. राजामनिक्यम द्वारा निर्मित पर्यावरण जागरूकता मापनी का प्रयोग किया गया। अध्ययन का मुख्य उद्देश्य शहरी छात्र एवं छात्राओं की पर्यावरण के प्रति जागरूकता की तुलना करना था। अध्ययन में शून्य परिकल्पना के माध्यम से यह परीक्षण किया गया कि दोनों समूहों की पर्यावरणीय जागरूकता में कोई सार्थक अंतर नहीं है। अध्ययन यह संकेत देता है कि पर्यावरणीय शिक्षा को केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित न रखकर व्यवहारात्मक एवं गतिविधि-आधारित बनाया जाना चाहिए, ताकि विद्यार्थी जल संरक्षण, ऊर्जा बचत, वृक्षारोपण, कचरा प्रबंधन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभा सकें। इस प्रकार प्रस्तुत शोध विद्यालयी पर्यावरण शिक्षा की प्रभावशीलता को समझने तथा विद्यार्थियों में सतत विकास, पर्यावरणीय उत्तरदायित्व और जागरूक नागरिकता की भावना को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार प्रदान करता है।