किशोरों के एकल अभिभावकों की कठिनाइयों का ग्रामीण एवं नगरीय परिप्रेक्ष्य में तुलनात्मक अध्ययन: अयोध्या जनपद के संदर्भ में
DOI:
https://doi.org/10.64880/pcjaict.v1i5.14Keywords:
एकल अभिभावक, किशोर, ग्रामीण-नगरीय तुलना, सामाजिक कलंक, अयोध्या जनपदAbstract
प्रस्तुत अध्ययन अयोध्या जनपद (उत्तर प्रदेश) में किशोरों का पालन-पोषण कर रहे एकल अभिभावकों द्वारा अनुभव की जाने वाली कठिनाइयों का ग्रामीण एवं नगरीय परिप्रेक्ष्य में तुलनात्मक विश्लेषण करता है। बढ़ते विधवापन, विवाह-विच्छेद एवं परित्याग के कारण एकल अभिभावक परिवार भारत में तेज़ी से एक महत्वपूर्ण सामाजिक यथार्थ बनते जा रहे हैं, फिर भी ग्रामीण-नगरीय अंतर पर साक्ष्य सीमित हैं। अध्ययन के दो मुख्य उद्देश्य थे, आर्थिक, मानसिक, सामाजिक तथा संतान-पालन संबंधी कठिनाइयों का मापन, और इन कठिनाइयों में ग्रामीण-नगरीय अंतर का परीक्षण। वर्णनात्मक सर्वेक्षण अभिकल्प के अंतर्गत 240 एकल अभिभावकों (120 ग्रामीण, 120 नगरीय) का चयन उद्देश्यपूर्ण निदर्शन द्वारा किया गया तथा संरचित कठिनाई मापनी से आँकड़े एकत्र हुए। परिकल्पना थी कि दोनों क्षेत्रों की कठिनाइयों में सार्थक अंतर पाया जाएगा। परिणामों से स्पष्ट हुआ कि ग्रामीण अभिभावकों में आर्थिक एवं शैक्षिक कठिनाइयाँ अधिक तथा नगरीय अभिभावकों में सामाजिक कलंक, भावनात्मक एकाकीपन एवं भूमिका-अतिभार अधिक है। निष्कर्षतः कठिनाइयों का स्वरूप क्षेत्र-सापेक्ष है, अतः ग्रामीण-नगरीय आवश्यकताओं के अनुरूप पृथक सहायता-नीतियाँ अपेक्षित हैं।