उपनिषदों में वर्णित योग तत्वों की विवेचना

Authors

  • विनोद प्रसाद शोधार्थी, स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय, देहरादून Author
  • डॉ. विपिन कुमार भट्ट शोध निर्देशक, स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय, देहरादून Author

DOI:

https://doi.org/10.64880/pcjaict.v1i5.26

Keywords:

उपनिषद्, अष्टांग योग, जाबाल दर्शनोपनिषद्, यम-नियम, प्राणायाम, समाधि

Abstract

प्रस्तुत शोध-पत्र में उपनिषदों में वर्णित योग तत्वों का समालोचनात्मक अध्ययन किया गया है। उपनिषद भारतीय दर्शन के मूल स्रोत हैं जहाँ योग का सैद्धान्तिक एवं व्यावहारिक विवेचन प्रमुखता से प्राप्त होता है। कठोपनिषद् (2.3.11) के अनुसार इन्द्रियों की स्थिर धारणा ही योग है - स्थिरामिन्द्रियधारणाम्। जाबाल दर्शनोपनिषद्, अमृतनादोपनिषद्, योगतत्वोपनिषद्, श्वेताश्वतरोपनिषद् एवं मैत्रायणि उपनिषद् में अष्टांग योग के यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान एवं समाधि का विस्तृत वर्णन मिलता है।शोध पद्धति के रूप में 12 प्रमुख उपनिषदों की विषय-वस्तु विश्लेषण पद्धति अपनाई गई है। निष्कर्षतः यह ज्ञात होता है कि पातंजल योगसूत्र में जहाँ 5 यम एवं 5 नियमों का वर्णन है, वहीं जाबाल दर्शनोपनिषद् में 10 यम (दया, आर्जव, क्षमा, धृति, मिताहार, शौच सहित) एवं 10 नियम (तप, संतोष, आस्तिकता, दान, ईश्वरपूजन, लज्जा, जप, मति, व्रत, सिद्धान्त श्रवण) का उल्लेख है। इसी प्रकार 9 आसनों (स्वस्तिक, गोमुख, पद्म, वीर, सिंह, भद्र, मुक्त, मयूर, सुख) तथा प्राणायाम को स्वर्ण शोधन की भाँति इन्द्रिय दोष निवारक बताया गया है। अतः उपनिषदीय योग केवल शारीरिक नहीं अपितु नैतिक एवं वेदान्तनिष्ठ है।

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Published

2026-09-27

How to Cite

उपनिषदों में वर्णित योग तत्वों की विवेचना. (2026). THE PARADIGM CHRONICLE JOURNAL OF ACADEMIC INQUIRY & CRITICAL THOUGHT, 1(5), 235-239. https://doi.org/10.64880/pcjaict.v1i5.26