शिक्षा में समावेशन और समान अवसर: राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के संदर्भ में एक अध्ययन
DOI:
https://doi.org/10.64880/pcjaict.v1i2.04Keywords:
समावेशी शिक्षा, समान अवसर, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, सामाजिक न्याय, SEDGs, दिव्यांग विद्यार्थी, शैक्षिक समानताAbstract
समावेशी एवं समानतामूलक शिक्षा लोकतांत्रिक समाज की आधारभूत आवश्यकता है, क्योंकि शिक्षा तक केवल औपचारिक पहुँच पर्याप्त नहीं है; प्रत्येक शिक्षार्थी को उसकी सामाजिक, आर्थिक, लैंगिक, भाषायी, भौगोलिक अथवा दिव्यांगता-संबंधी परिस्थितियों से परे गुणवत्तापूर्ण सीखने, सहभागिता और प्रगति के समान अवसर मिलना आवश्यक है। प्रस्तुत शोध आलेख का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के संदर्भ में शिक्षा में समावेशन और समान अवसर की अवधारणा, नीतिगत प्रावधानों, उपलब्ध प्रगति तथा प्रमुख चुनौतियों का विश्लेषण करना है। अध्ययन वर्णनात्मक-विश्लेषणात्मक प्रकृति का है और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, UDISE+ 2023-24, AISHE 2021-22 तथा शिक्षा मंत्रालय के आधिकारिक दस्तावेजों पर आधारित है। विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि नीति ने सामाजिक एवं आर्थिक रूप से वंचित समूहों, बालिकाओं, ट्रांसजेंडर विद्यार्थियों, अनुसूचित जाति-जनजाति, अल्पसंख्यकों, ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों तथा दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए समान अवसर को शिक्षा व्यवस्था का केंद्रीय सिद्धांत बनाया है। विद्यालयी स्तर पर 2023-24 में 24.80 करोड़ से अधिक नामांकन तथा 21.14 लाख CWSN विद्यार्थियों की उपस्थिति समावेशन के व्यापक दायरे को दर्शाती है, जबकि उच्च शिक्षा में 2021-22 का GER 28.4 और महिला GER 28.5 रहा। तथापि पहुँच, निरंतरता, अधिगम-गुणवत्ता, डिजिटल विभाजन, भौतिक सुगम्यता, भाषा और शिक्षक-तैयारी से जुड़ी चुनौतियाँ बनी हुई हैं। आलेख निष्कर्ष देता है कि वास्तविक समान अवसर के लिए ‘एक जैसी व्यवस्था’ के स्थान पर आवश्यकता-आधारित शैक्षिक समर्थन, संस्थागत उत्तरदायित्व और डेटा-आधारित सतत निगरानी आवश्यक है।